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महिकावती (माहिम)ची बखर
कथा वर्तलि सत्य ।। ती आईका आतां ॥ २९३ ॥
पैठणि राहिले नव जण ।। शेषवंशि जाण ।।
त्यांचि कुळगोत्रें येथुन ।। कुळदेवतायुक्त ॥ २९४ ॥
काळदंत १ | गोत्र हरिद्र १ | कुळदेवता हिरबाय १ |
सोमदंत २ | गोत्र हरित २ | कुळदेवता हरबादेवी २ |
विख्यात ३ | रेणुक ३ | कुळदेवता जोगेश्वरी ३ |
हेमरक्त ४ | कपिल ४ | कुळदेवता काळिका ४ |
कृतांत ५ | कपिलध्वज ५ | कुळदेवता वज्राये ५ |
विरुदंत ६ | कासेश्वर ६ | कुळदेवता येकविरा ६ |
येक्षदंत ७ | आस्तिक ७ | कुळदेवता महालक्ष्मी ७ |
काळकोट ८ | विरोध ८ | कुळस्वामिण वज्राय ८ |
शुभ्रमणी ९ | नृसिंह ९ | कुळस्वामिण येकविरा ९ |
ऐसिं सांगितली घोत्रें कुळदेवता ।। १३५ वर्षे भरलिं पैठणि नांदतां ।।
या परि शेषवंशउत्पनता ॥ विश्वामित्रवाक्यें ।। १ ।।
पुढा परंपरा चालिली ।। कथा सविस्तारें सांगितली ।।
साक्ष ब्रम्होत्तरी दिधली ॥ विश्वामित्रवाक्यें ॥ २ ॥
स्वधर्म शेषवंशाक्षी ।। द्वादश वरुपिं संस्कार तथासी ।।
गणेशमंत्र जपमाळिकेसी ।। सांगितला असे ॥ ३ ॥
पुराणमंत्रि क्रियाकर्म ।। वर अश्व आसन ।।
बाहुटा आरक्तवर्ण ।। छत्र येक ॥ ४ ॥
सोहोळा दिवस नव ।। करावा लग्नउत्साव ।।
शेषवंशिचा निर्वाह ।। सांगितला सत्ये ॥ ५ ॥
पुढां लोमक प्रतिलोभक ॥ ज्ञाति जाल्या अनेक ।।
त्या भविष्योत्तरपुराणि सकळिक ।। सविस्तारें सांगितल्या ।। ६ ।।
इति श्रीब्रम्होत्तरखंडे भविष्योत्तरपुराणे महाऋषिसंवादे
वंशविंवचनाधर्मस्थापननाम द्वीतियोध्यायः ॥ २ ॥