मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड बावीसावा (१७९२-९३)

रा कृष्णराव देवाजी नवाब                                                          लेखांक १२५.                                                      १७१४ माघ शुद्ध १२.
बंदगानअली यांचे पत्र व तीळ आले त्याचे
उत्तर रा छ १० जाखर सन १२०२.

राजश्रिया विराजित राजमान्य राजश्री कृष्णराव स्वामीचे सेवेसी-
पो गोविंदराव कृष्ण सां नमस्कार विनंति उपरि एथील कुशल जाणून स्वकीयें लिहित असावें विशेष तुह्मी पत्र व मकरसंक्रमण-प्रयुक्त तीळ शर्करा–युक्त थैलींत पा ते तुमचे लिहिल्याप्रो श्वीकार केला एथूनहि तीळ शर्करायुक्त थैली व पत्र तुमचे नावें टप्यावरून रवाना जाले आहे. राजश्री आपाजी कोंडाजी पावतें करतील रा छ १० माहे जादिलाखर बहुत काय लिहिणे लोभ कीजे हे विनंति.

Joomla! Debug Console

Session

Profile Information

Memory Usage

Database Queries