मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड बावीसावा (१७९२-९३)

                                                                                  लेखांक २.                                                    १७१४ कार्तिक वद्य ४.

आबाजी बलाल कारकून नि।। राजश्री हरीपंत तात्या याणी पत्रें व कौल आणविले त्या प्र।। रवाना केले औरा देस छ १६ र।।वल मु॥ भागानगर,

श्रीमंत राजश्री पंतप्रधान -
कौलनामा बमोहर राजश्री गोविंदराव कृष्ण नि॥ त॥ मारवाडियान व बेपारियान मौजे अवराद व पेंठ शाहाज्यानी प॥ उदगीर जागीर इनाम राजश्री हरिपंततात्या सु॥ सलास तिसैन मया व आलफ सांप्रत तुमचे वर्तमान विदित जालें कीं तुह्मी पेठ मजकुरी राहून धंदा उदीम करीत नाहीत व वसवास करून आहांत त्याजवरून हा कौल सादर केला असे कीं तुह्मी आपली खातरजमा राखोन सुदामत प्रो गला वगैरे जिनसाची मौजे मजकूरचे बाजारांत खरेदी फरोख्ती करीत जाणे कोण्हे गोष्टीचा वसवास न करणे तुह्मास उपद्रव होणार नाही एविसी कौल जाणिजे छ १६ र॥ल मोर्तब सूद