मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड बावीसावा (१७९२-९३)

जीवनराव पांढरे यांचे पत्राचे उत्तर.                                                 लेखांक २२०.                                                      १७१५ वैशाख शुद्ध ८.

राजश्री जीवनराव पांढरे समसेर बाहदुर गोसावि यास-

5 अखंडितलक्ष्मीअलंकृत राजमान्य श्री गोविंदराव कृष्ण आसीर्वाद विनंति उपरि एथील कुशल जाणून स्वकीयें लिा असावें विशेष तुह्मी पत्र पा तें पावलें भेटीस येण्याविषी लिहिलें त्यास उत्तम आहे यावें भेटीनंतर कळेल शाकभाजी तुह्मी पाठविली ती पावली रा छ ७ सवाल बहुत काय लिो लोम कीजे हे विनंति.

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