[४९]                                                                              ।। श्री ।।                                                         १२ जून १७५५

 

राजश्री गोपाळराव गणेश गोसावी यांसिः-

अखंडित लक्ष्मी अलंकृत राजमान्य राजश्री जयाजी शिंदे दंडवत विनंति येथील कुशल तागाईत छ १ माहे रमजान जाणोन स्वकीय कुशल लेखन करीत गेले पाहिजे. विशेष. पत्र पाठविलें तें प्रविष्ट जाहलें. तेथें मजकूर कितेक तपशिलें खासगत स्वाराच्या सिबंदीविशीचा मजकूर फारच लिहिला जे श्रीमंत साहेबास हिशेबाविसी पत्र पाठविलें ह्मणजे आपला गळा उगवतो ह्मणोन लिहिलें. त्याजवरून श्रीमंतास विनंतिपत्र पाठविलें असे. हें त्यास प्रविष्ट करून आपलें काम हिशेबाकितेबाचे असेल त्याप्रमाणें अर्ज हुजूर करून करून घेणें. र॥ छ मजकूर. बहुत काय लिहिणें. हे विनंति.


शिक्का

मोर्तब सुद

 


 

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