मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड एकोणीसावा (१७७९-१७८४)

                                                                                       लेखांक ८.                                                 
१७०१ कार्तिक वद्य ३०.                                                श्री.                                                      ७ डिसेंबर १७७९.

राजश्रिया विराजित राजमान्य राजश्री
कृष्णराव तात्या स्वामींचे सेवेसीं:-
पो। कृष्णराव बल्लाळ सं॥ नमस्कार विनंति उपरी. येथील कुशल जाणून स्वकीय लिहीत जावें. विशेषः- राजश्री आपा यांस तुह्मीं पत्र पाठविलें, त्यांत लिहिलें कीं, नबाब हैदर अलीखां यांचे घरीं शादी आहे. त्यांचींही पत्रें शादीचीं आलीं, तें राजश्री आनंदराव नरसिंह देतील. त्यास, लग्नास आहेर सरकारचा असावा, त्यावरून आह्मी राजश्री नाना यांसीं बोलिलों. वस्त्रें वगैरे पाठवावयाचा निश्चय जाला. राजश्री आनंदराव आदियाप वांईहून आले नाहींत. ते आल्यावर सांडणीस्वाराबराबर सनगें रवाना आपणाकडे होतील. तुह्मीं लांब लांब मजली करून जावें. दिवस कांहीं राहिले नाहींत. राजश्री नरसिंगराव सावनुरांत घर आहे ह्मणोन गुंततील, आएश आरामांत पडतील. त्यास, ऐसें न व्हावें. * निकड करून लौकर जावें. र॥ छ २८ जिल्काद बहुत काय लिहिणें, लोभ असों दीजे. हे विनंति. मै॥ छ १८ जिल्हेज. मार्गेश्वर मास. मु॥ नेगलूर प्रां। सावनूर.