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                                                                                   लेखांक १८५

                                                                                                       श्री                                                          १६२३ मार्गशीर्ष वद्य
                                                                                                                                                                         तालिक

                                                                                          185

स्वस्तिश्री राज्याभिषेक शके २८ वृषा नाम संवत्सर मार्गशीर्ष बहुळ सप्‍तमी गुरुवासरे क्षत्रिय कुलावतंस श्री राजा शिव छत्रपती याणी सुभेदार व कारकून सुभे लस्कर व पागा शिलेदार व किले हाय व बाजे यासी आज्ञा केली ऐसी जे श्री सदानंद याचे मठास अन्नछत्राकरणे भवानगीर गोसावी यास मौजे इडमिडे व निंब पौ। जमीन कैलासवासी स्वामीनी इनाम दिल्हा आहे तेणेप्रो स्वामी चालवीत असता तुह्मी उपद्रव देता ह्मणून विदीत जाले तरी गोसावी याचे इनामतीस उपद्रव द्यावा ही कोण रबेश याउपरी गोसावी याचे इनामास एकजरा तोसीस न देणे बोभाट आलीया मुलाहिजा होणार नाही हें जाणून लि॥ प्रो। वर्तणूक करणे जाणिजे निदेश समक्ष मोर्तब रुजू सुरुसुद


[ ४२ ]

श्री. शके १६५१ श्रावण वा। १०.

आज्ञापत्रसमस्तराजकार्यधुरंधर विश्वासनिधि राजमान्य राजश्री बाजीराव पंडीत श्रीमुख्यप्रधान ता। जमीदार कसबे संबळगड. संवत १७८५. तमारे गांवकी षडीमुकरर सलहालकी रुपया १ ००१ एक हजार एक रुपया करार किये. हेसो. वसूल देकर. गांमकी आबादी कर. षुशाल रहियो. जाणिजे. छ० २३ मोहरम. आज्ञाप्रमाण.
लेखन
सीमा.


० श्री ॅ
राजाशाहुनरपति
हर्षनिधान बाजी-
रावबल्लाळ मुख्य
प्रधान  * 
                                                  बार

                                                                                   लेखांक १८४

                                                                                                       श्री                                                          १६२३ मार्गशीर्ष वद्य

                                                                        184

स्वस्तिश्री राज्याभिषेक शके २८ वृष नाम संवत्सरे मार्गशीर्ष बहुल सप्‍तमी गुरुवासरे क्षत्रिय कुलावतंस श्री राजा शिव छत्रपती याणी राजश्री देशाधिकारी व कारकून प्रात वाई यासि आज्ञा केली ऐसी जे मोजे इडमिडे व निंब पैकी जमीन श्री सदानंद याचे मठास अन्नछत्राकारणे भवानगिरी गोसावी यासी इनाम दिल्हा आहे ऐसे असता तुह्मी वेटबेगारीचा व हरएक विशीचा उपसर्ग देता ह्मणून विदित जाले तरी कैलासवासी स्वामीने गोसावी सत्पुरुष याकरिता इनाम देऊन चालविला असता तुह्मास उपसर्ग द्यावया गरजा काय हे रीत स्वामीस मनात नाही याउपरी पहिलेपासून गोसावी यास इनाम चालत आलीयाप्रमाणे पुढेही बिलाकुसूर उपद्रव द्याल की कथळा कराल ह्मणिजे मुलाहिजा होणार नाही जाणिजे निदेशसमक्ष


                                                                                              184 1

[ ४१ ]

श्री. शके १६५१ श्रावण श्रु॥ १३.

राजश्री सटवाजी जाधव गोसावी यांसिः--

 अखंडितलक्ष्मीअलंकृत राजमान्य स्ने॥ बाजीराव बल्लाळ प्रधान आशीर्वाद सु॥ सलासैन मया अलफ. तुह्मांकडे सालगुदस्ताचे सरदेशमुखीचा मख्ता, पैकी रुपये येणें आहे. त्यापैकीं गु॥ राजश्री सघो अनंत जमास्वारी राजश्री चिमणाजी बल्लाळ जमा पोता रुपये ६०० साहाशे जमा जाले. मजुरा असेत. जाणिजे. छ० १ १ मोहरम. + बहुत काय लिहिणें ?

लेखन
सीमा.
० श्री ॅ
राजाशाहू नरपति हर्षनिधान
बाजीराव बल्लाळ प्रधान.
बार.

                                                                                   लेखांक १८३

                                                                                                       श्री                                                          १६२३ मार्गशीर्ष वद्य ७

 श्री शिवभक्तीपरायण तपोनिधी भवानगिरी गोसावी वा। निंब यास प्रती राजश्री राजा शिव छत्रपती उपरी तुह्मी पत्र पाठविले ते पावले लिहिले वर्तमान कळो आले आपणावरी कैलासवासी राजश्री स्वामीने दया करून चालविले अन्नछत्राकारणे इनाम दिल्हा त्यास हाली महालचे कारकून व लष्करचे लोक उपसर्ग देताती तरी निरोपद्रव इनाम चाले ऐसे केले पाहिजे ह्मणून लिहिले ऐसीयास तुह्मी ह्मणिजे सत्पुरुष तुमचे सर्व प्रकारे चालवावे हे उचित त्यास स्वामीसही तुमचे चालवणे अवश्यक आहे कैलासवासी स्वमीने तुमचे चालविले तैसे स्वामीही चालवितील प्रस्तु(त) तुमच्या इनामास उपसर्ग न द्यावा ह्मणून ताकीदपत्रे पाठविली आहेती ते देणे याउपरी कोण्ही तोसीस देणार नाही तुह्मी इनाम अनभऊन स्वामीचे व स्वामीच्या राज्याचे कल्याण चितून सुखरुप असणे छ २१ माहे रजब जाणिजे बहुत काय लिहिणे


                                                                                              169 2

[ ४० ]

श्री. शके १६५१ श्रावण शुद्ध १.

राजश्री अंबाजीपंततात्या गोसावी यांसिः-

 सकलगुणालंकरण अखंड़ितलक्ष्मीअलंकृत राजमान्य स्नो। दावलजीराव सोमवंशी सरलष्कर दंडवत विनंति उपरि येथील कुशल जाणोन स्वकीय लिहिलें पाहिजे. आपण पत्र पाठविलें तें प्रविष्ट होऊन लेखनार्थ कळला. सनदापत्रांविसीं कारकूनासी बोलावें लागतें. तो ऐवज नेमून लेहून पाठवणे. त्यासारखी बोली करणें ती करूं. व रामाजा दामोधर यांचे शंभर रुपयांची निशा होय, तें करणें. व चोपदारास खर्चास द्यावें लागतें त्याची बेगमी करून पाठविणें, ह्मणोन लिहिलें तरी कारकुनासी जे बोली करणें ते आपण करावी. त्यास पैका आह्मी बिलाकुसूर पाववूं. सनदापत्रांकरितां तट जाला आहे. राजपत्राचा उजूर करितात कीं राजपत्रें दाखवून अंमल करणें. तरी राजपत्रें सत्वर सिध करून पाठविलीं पाहिजेत. राजश्री रामाजी दामोधर यास रुपये १०० संभर सुभाचेऐवजीं देवविले आहेत. पावतील. चोबदारास द्यावयास वीस पंचवीस रुपये लागले तरी हरकोणाचे घेऊन आपण द्यावे. आह्मी प्रविष्ट करून. आमचें वर्तमान तरीः नवे लोक जे ठेवणें ते ठेवीत आहों. यास पक्ष येथेंच लागेल. हें वर्तमान आपणांस कळावें यास्तव लिहिलें असे. आमचा विचार जो आहे तो आपणांस विदितच आहे. रुपयांस जागा नाहीं, कर्जवामही मिळेना, ऐसा प्रसंग आहे. तरी, आपले विद्यमानें कर्जवामाची तरतूद होईल तरी करून आह्मांस लिहावें. आह्मीं खतें करून पाठवून. निदान कोठे रुपया न मिळे यास्तव आपणांस लिहिलें असे. आह्मांस जैसे तीर्थरूप तैसे आपण. असेल वर्तमान तें आपणांस सांगावें, या करितां लिहिलें असे. हरसूल, इंदापूर, व वासीम, वगैरे माहाल यांचा मुबादला राजश्री स्वामींनी घ्यावयाचें मान्य केलें आहे. तरी आपण राजश्रीस विनंति करून मुबादला जें करून घेणें तें करून घेतलें पाहिजे. राजपत्रें गढें व बुंधेलखंड व अजनुज देखील कुल येथें सत्वर पाठवावीं. व राजश्रीं आनंदराव सुमंत यांस सांगेन सदाशिव माहादेव सबनीसीस न ये, तें करणें. तो आला तरी त्यास आह्मी सोबतीस ठेवणार नाहीं. दुसरा पाठवतील, तर चालवूं. कळलें पाहिजे. रा। छ. २९ जिल्हेज. राजश्री सिदोजी निंबाळकर यांणीं मनमाने तैशी पलीकडे वागमोडीयांच्या व वरकड आह्मांकडील सरंजामांत रोखे करून धामधूम मांडली आहे ; ह्यामुळें त्यांचा आमचा कथळा होईल. तरी, त्यास हुजरून ताकीदपत्रें जाऊन ते कथळा न करीत तें करावें. इतकें असोन याउपारि त्यांणी कटकट केली तरी त्याचें पारपत्य करून. व सनदा राजपत्रें सत्वर पाठविलीं पाहिजेत. छ. मा।र. बहुत काय लिहिणें ? * * हे विनंति.
           मोर्तब
           सूद.
० ॅ
श्रीराजाशाहुछत्रपति
स्वामिचरणितप्त-
र दावलजी सोमोसी
सरलश्कर निरंतर.

                   मोकदम मौजे दिये
                   संभाजीचा लेक.
                   वाडीकर संभाजी बिन संताजी.

[ ३९ ]

श्री.
शके १६५१ आषाढ वा। ६.

राजश्री पिलाजी जाधवराउ गोसावी यासि :-

छ अखंडितलक्ष्मीअलंकृत राजमान्य स्नो। बाजीराउ बल्लाळ प्रधान अशीर्वाद. सु॥ हिंसा अशरैन मया अलफ. बद्दल देणें. नारायणदास गंधी अबरंगाबादकर यापासून सूध जिन्नस खा। केला. त्यास रु॥ २६९॥ दोनशेंसाडेएकुणहात्तर रास देविले असत. सालमजकुरच्या ऐवजीं सदरहु रु॥ पावते करणें. जाणिजे. छ. १९ जिल्हेज. बहुत काय लिहिणें ?
लेखन
सीमा.

० श्री ॅ
राजाशाहुनरप
ति हर्षनिधान
बाजीराव बल्लाळ
मुख्यप्रधान  *

 

                                                                                   लेखांक १८२

                                                                                                       श्री                                                          १६२३ मार्गशीर्ष वद्य ३

                                (फारसी मजकूर)                                                                                                      (शिक्का)

जबदतुल एकरान तुलाजी पाटील मोकदम मौजे नीम पा। वाई सु।सन १११२ अलम अमीरा सिखतपन्हा सेख आ। जबर आ खी जमीन का। नीबची मोजिली तेव्हा जमीन गोसावियाची अलाहिदी केली आनी तुह्मी आता गोसवियासि ताकीद पैसियाची करिता हे मुनासीब नाही आता गोसावियासि मुजाहीम न होने देसमुख देसपाडये व सेख जबरने ते जमीन वेगली केली आता ता हरगीज मुजाहीम न होने जमाबदीत ते जमीन आली नाही नाहक गोसावियासि आ-जार न देने दरीबाब ताकीद दानद मो। सूद

तो। छ १६ रजबू

[ ३८ ]

श्री. शके १६५० फालगून वा। ३.

राजश्री पिलाजी जाधवराउ गोसावी यांसि :-

अखंडितलक्ष्मीअलंकृत राजमान्य

  स्नों बाळाजी विश्वनाथ आशीर्वाद विनंति उपरि येथील कुषल जाणून स्वकीय कुषललेखन करणें. विशेष. हुजूरचा दरमाहेचा ऐवज सरदेशमुखीचे ऐवजीं विद्यमान राजश्री राघो अनंत बराबरी व्यंकोजीराम हुंडी गु॥ माणकोबा नाईक पाटक जमा पोता रुपये ५०० पांच(शें) पावले असेत. जाणिजे. छ. १७ साबान मुहुरसन तिसा अशरीन मया अलफ. बहुत काय लिहिणे ? लोभ असो दीजे. हे विनंति.

लेखन
सीमा.
० श्री ॅ
राजाशाहुनरपति-
हर्षनिधान बाजी-
राव बल्लाळ
प्रधान

[ ३७ ]

श्री. शके १६५० माघ वा। १४.

राजश्रियाविराजित राजमान्य राजश्री रामाजीपंत दि॥ राजश्री पिलाजी जाधवराउ स्वामी गोसावी यांसि :--

पोष्य * बाळाजी विश्वनाथ नमस्कार विनंति उपरि येथील कुशल जाणून स्वकीय कृषल लेखन करणें. विशेष. राजश्री रामाजी बळवंतराउ देवकांते यांनी राजश्री अंबाजीपंततात्या यांचे नांवें पत्र लेहून पाठविले. त्याची नकल तुह्मांकडे पाठविली आहे. त्यावरून कळों येईल. मारनिल्हांनी मोहरा ८० ऐशी एकूण रुपये हजार १००० पाठविले, ह्मणून लिहिलें. त्यास, बाजारनिरख चौकशी करून अलाहिदा जावे आह्मी रुपये ९६५॥ नवशेसाडेपासष्टी रूपयांचा लेहून दिल्हा आहे. तरी तुह्मी आपली कागद राजश्री पिलाजी जाधवराउ यास व रामाजी बळवंतराउ दवकांते यांस लेहून दिल्हा पाहिजे. जाणिजे. छ० २७
रजब सुहूरसन तिला अशरिन मया अलफ. बहुत काय लिहिणें ?

लेखन
सीमा.

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